मरक़ुस 14:5 - उर्दू हमअस्र तरजुमा5 ये इत्र तीन सौ दीनार से ज़्यादा की क़ीमत में फ़रोख़त किया जा सकता था और रक़म ग़रीबों में तक़्सीम की जा सकती थी।” पस वह उस ख़ातून को बहुत बुरा भला कहने लगे। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20195 क्यूँकि ये इत्र तक़रीबन तीन सौ दिन की मज़दूरी से ज़्यादा की क़ीमत में बिक कर ग़रीबों को दिया जा सकता था” और वो उसे मलामत करने लगे। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस5 इसकी क़ीमत कम अज़ कम चाँदी के 300 सिक्के थी। अगर इसे बेचा जाता तो इसके पैसे ग़रीबों को दिए जा सकते थे।” ऐसी बातें करते हुए उन्होंने उसे झिड़का। Viz kapitola |