याक़ूब 3:2 - उर्दू हमअस्र तरजुमा2 हम सब के सब कई तरह से ख़ता करते हैं। मगर कामिल शख़्स वो है जो बोलने में कभी ख़ता नहीं करता। ऐसा आदमी ही अपने सारे बदन को क़ाबू में रखने के क़ाबिल है। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20192 इसलिए कि हम सब के सब अक्सर ख़ता करते हैं; कामिल शख़्स वो है जो बातों में ख़ता न करे वो सारे बदन को भी क़ाबू में रख सकता है; Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस2 हम सबसे तो कई तरह की ग़लतियाँ सरज़द होती हैं। लेकिन जिस शख़्स से बोलने में कभी ग़लती नहीं होती वह कामिल है और अपने पूरे बदन को क़ाबू में रखने के क़ाबिल है। Viz kapitola |