1 कुरि 13:1 - उर्दू हमअस्र तरजुमा1 अगर मैं इन्सानों और फ़रिश्तों की ज़बानें बोलूं लेकिन महब्बत से ख़ाली रहूं तो मैं ठनठनाते हुए पीतल या झनझनाती हुई झांझ की मानिन्द हूं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20191 अगर मैं आदमियों और फ़रिश्तों की ज़बाने बोलूँ और मुहब्बत न रख्खूँ, तो मैं ठनठनाता पीतल या झनझनाती झाँझ हूँ। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस1 अगर मैं इनसानों और फ़रिश्तों की ज़बानें बोलूँ, लेकिन मुहब्बत न रखूँ तो फिर मैं बस गूँजता हुआ घड़ियाल या ठनठनाती हुई झाँझ ही हूँ। Viz kapitola |