प्रकाशितवाक्य 5:13 - सिरमौरी नौवाँ नियम13 तोबै मोऐं स्वर्ग दा, औरौ धोरती पांदी, औरौ धोरती कै धैनै, औरौ समुन्द्र कै सौब बाणैयौंदी चीज़ौ खै, औरौ सौब ठुँ खै जू तिथमुंजी औसौ, ऐजौ बौलदै शुणु, “आव आमै सिंहासन पांदी बौठैयौंदे की औरौ मेम्ने की स्तुति औरौ आदर, औरौ महिमा हमैशा-हमैशा कारिए कौरदै रोऊं, जिथुकै सै सौबिदा जादा शौकतीशाली औसौ।” Viz kapitolaSirmouri13 तेष्णीं ही मुँऐं बादी संईसारी-स्वर्गो दी, ईयों धर्ती थाँई पताल़ो दी, संमुन्द्रो अरह् तिन्दी बंसी अंदी बादी सिर्जी-बंणाई अंदी चींजो दी, अरह् सब-कुछ जुण्जो किऐ तिन्दो असो, तिनू ऐजो बुल्दे शुँणों: “छ़ैल्टे का अरह् सिंगाँस्हणों गाशी बईठा अंदा असो, स्त्तुति, आदर, बड़ियाऐ, अरह् हंक-अधिकार, सदा-सदा हंदा रंह्!” Viz kapitola |