प्रकाशितवाक्य 14:4 - सिरमौरी नौवाँ नियम4 ऐजै सैजै औसौ जू पवित्र जीवन जियौंए। ऐजै तिनु लोगौ कै जैशणै औसौ, जिनुवै ऐक बैई बै नाजायज सौमबंध ना बाणी औरौ ना ही इनुवे कौलोंई कियौंई चीज़ौ कै पूजा कौरे, ऐजै सिरफ मेम्ने कै ही आराधना कौरौ जिथै मेम्ना जांव, ऐजै लोग तैसकै पौछौड़ियौ हौए जांव। ऐजै सैजै औसौ जिनुकै धोरती कै सौबी आदमियों शै जौई कौरे राए। जैशै लोग आपणै खेतौ कै फसल का सौबिदा आछा हिस्सा पौरमेशवर कै दैंव तैशैखैई ऐजै लोग बै आपणै जीवन कै पूरी पवित्रता कै साथै पौरमेशवर औरौ मेम्ने कै दैंव। Viz kapitolaSirmouri4 से सेजे लोग असो, जुण्जे तिरंई की गईलो हेबी तोड़ी अशुद्ध ने हऐ रंई थी, अरह् से कुँवाँरें असो; से सेजे ही असो, जुण्जे हमेशा छ़ैल़्टे पाछ़ी चालो भाँव छ़ैल़्टा कैथी भे ज़ाँव; तिनू पंण्मिश्वर अरह् छ़ैल़्टे खे बिश्वाष की आगली ही ऊपज का जिया फ़ल़ आदमी मुझ्शे चूणें-छ़ाँटे गुवे। Viz kapitola |