प्रकाशितवाक्य 18:14 - Sirmouri14 ऐबे तेरे मंन पसंन्द के फल़, ताँव कैई शे ज़ादे रंह्ले, अरह् सुवाद, अरह् चट्-पंटी चींजो ताँव शी दुर्की हऐ रंई, अरह् से हजो कंद्दी ने भेट्दी। Viz kapitolaसिरमौरी नौवाँ नियम14 व्यापारी तियौं कैई बौलदै, “सैजी सारी चीज़ौ जिनकै तू चाहत राखै थी ऐबै ना आथी। सैजी सारी धीमी खुशबू वाल़ी चीज़ौ जू ताखै पसंद थै, सैजी सौबै चीज़ौ जिनु तू आपणै शोरीर खै सुन्दर बाणणौ कारिए इस्तैमाल कौरौ थै, सैजी सौबै आरची गोई, सैजी ऐबै ना भैटदी।” Viz kapitola |