34 अरह् स्वर्गो के ढबे दे:खियों, शुष्कार भरा, अरह् तेस्खे बुलो, “इप्फतह”! मतल्व “खुल ज़ा।”
34 औरौ स्वर्ग कै ढौबौ दैखैयो शुशकार भोरा, औरौ तैसी आदमी खै बौल़ौ, “इप्फतह!” यानी “खोले जा!”