16 (जे कुँऐं शुण्दे-भोंण्दे हों जिनके शुण्णों खे काँन हों से काँनों लाऐयों शुणें)”
16 जिनु कुणिए मैरै बात शौणै लोए, सै ध्यान सै शोणेयो।”