18 जू झाड़ी मुँझी पड़ो, से ऐजो असो, के जिन्ऐं पंणमिश्वर का बचन शुणा।
18 औरौ किछै बीज़ ऐशणै औसौ जू झाड़ी मुंजी छुटै, ऐजै सैजै लोग औसौ जिनुवै पौरमेशवर कै वचन कै शुणा,