31 अरह् ओकी कैई शा जैष्णा तू बरताव आपु खे चाँऐं, तैसी आरी तू तैष्णा ही बरताव करे।
31 जैशै तुऐं चांव कै लोग तोंवारै साथै कौरौ, तुऐं बै तिनकै साथै ऐशणाई बर्ताव कौरौ।”