43 अरह् ऐजी कृपा मुँह गाशी कैथे शी हऐ, के मेरे प्रभू के माँ मुँह कैई आऐ?
43 हांव ताखै इथै दैखैयो आपी खै खुशनसीब महसूस कौरु, कै मैरै प्रभु कै माँ मुखै भैटदै आए रौए?