12 जू तुँऐं गीद्दी-आल़सी ने बंणी ज़ाँव, परह् तिनके जैष्णें बंणों, जू बिश्वाष अरह् धीरज-सबैर के कारण प्रभू के बाय्दे के हंकदार असो।