28 (तब पवित्रशास्त्र कर ओ बचन हर कि ओहर अपराधी मन संग गिनल जाही, पूरा होईस)।
28 (तब पबितर किताब कर ओ बचन “ओहर पापी मन कर संगे गनाही” ओहर पूरा होईस।)