42 अउ तुरतेच ओकर कोढ़ हर जात रहिस, अउ ओहर शुद्ध होए गईस।
42 त ओहीच घनी ओकर कुड़गा बेमारी हर हएट गईस अऊ ओहर सुध होए गईस।