42 ओ दिन हर तियारी कर दिन रहीस, जेहर बिसोए कर दिन ले पाछू होथे, एकरले जब सांझ होए गईस,
42 जब सांझ होए गईस, काबर कि सब्त कर दिन रहिस, जेहर सब्त कर दिन ले एक दिन आगू होत रहिस,