34 त तेन सुआ बीमार मेह्णु सुसुरेरि छड़े जे हर किस्मी बीमारी बेलिए कष्ट अन्तर थिए। तेन सुआ मेह्णु केआं दुष्ट आत्मा बाहर किढ़ि, त तेन्हि बोलुण न दुतु, किस कि से तेस पिछाणतीथ।