रोमियो 11:10 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान10 तिन्नां का निं आपणीं आजू एछणैं आल़ी खरी एछणेंओ थोघ लोल़ी लागअ। परमेशर दैए तिन्नें मसीबता दी सदा दाह-दुख।” Viz kapitolaकुल्वी10 होर तिन्हरी औछ़ी निहारी लोड़ी हुई ताकि किछ़ नी लोड़ी हेरुआ, होर तू हमेशा तिन्हरी परेशानी न झुकाईया रख।” Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम10 त्याह री आछी पेन्दे निहारा हुणा की नांई हेरी सके, होर तूह सदा त्याह री पीठी झुकाई ढाहे। Viz kapitola |