प्रकाशितवाक्य 5:9 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान9 तिंयां लागै एही नऊंईं गिहा बोलदै, “तूह आसा एसा कताबा खोल्हणैं और एते मोहरा खोल्हणैं जोगी। “किल्हैकि तंऐं लऐ आपणअ बल़ीदान दैई लोहू करै हर ज़ाती, हर भाषा का, और हर रंगे लोगा और हर देशा का लऐ छ़ुटकारअ दैई परमेशरा लै लोग मोलै। (प्रगट की दी गल्ला 5:12) Viz kapitolaकुल्वी9 होर ते एक नोंऊँआं गाणा गाँदै लागै कि, “तू ऐसा कताबा लेणै होर तेसरी मोहरा चोड़नै रै लायक सा; किबैकि तैं वध होईया आपणै लोहूये लाइया हर एक कुल, भाषा, लोका होर ज़ाति न परमेश्वरै री तैंईंयैं लोका कीमतियै लेऐ सी। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम9 होर त्याहा एउ नऊयी गीहा बोलद लागे, तूह एसा कताबा निण होर एतकी मोहरा खोलणे लाईक साहा, किबेकि ताए आपणें मुड़ काटी करे आपणे लोहू संघे हर कुल होर भाषा होर लोका होर जातियो मेंज़ा का परमेश्वरा री तणी लोका दाम करी दे साहा। Viz kapitola |