प्रकाशितवाक्य 3:17 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान17 तूह ज़ुंण इहअ बोला कि हुंह आसा सेठ, और हुंह आसा गअ द सेठ हई, और मुंह निं किछ़ी गल्ले कामीं पेशी आथी। ताखा निं इहअ थोघ आथी कि तूह आसा नभागी, नकाम्मीं, गरीब, कांणी और नांगी। (होशा 12:8) Viz kapitolaकुल्वी17 तू ज़ो बोला सा कि हांऊँ सेठ सा होर धनी हुआ सा होर मुँभै कौसी च़ीज़ै री कमी नी ऑथि पर ऐ नी ज़ाणदा कि तू अभागा, तुच्छ, कांणा होर नाँगा सा। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम17 तूह जोह बोला की हाऊं सेठ साहा होर धनवान होऊ, होर महा कासी गला री कामी नांई आँधी, होर तूह यह नांई जाणदअ की तूह अभागअ, होर तुच्छ कंगाल, होर आंधअ होर नेगअ साहा। Viz kapitola |