प्रकाशितवाक्य 22:15 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान15 पर बूरै करनै आल़ै, ज़ादू करनै आल़ै, कंज़रै, हत्या करनै आल़ै, मुर्ति पूज़ा करनै आल़ै और हरेक झ़ुठअ च़ाहणैं आल़अ और बोल़णैं आल़ै निं कधि नगरी दी डेऊई सकदै। Viz kapitolaकुल्वी15 पर कुतै टोणै, व्यभिचारी, खूनी, मूर्ति पूज़ा केरनु आल़ै होर झ़ूठा बै च़ाहणू आल़ै होर गलत केरनु आल़ै बाहरै रौहणा। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम15 पर कुते होर टोहणे, होर व्यभिचारी, होर हत्यारे होर मूर्ति पूजा करन आले, हर एक झूठा का प्रेम करन आले होर गढ़न आले बागे रहणे। Viz kapitola |