प्रकाशितवाक्य 2:4 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान4 “पर मुखा शुझुई ताह दी एही गलती कि तंऐं छ़ाडअ मुखा पैहलै ज़ेही झ़ूरी करनी। Viz kapitolaकुल्वी4 पर मुँभै तेरै खिलाफ़ ऐ शिकायत सा कि तुसै ऐबै मूँ सैंघै तैण्ढी झ़ुरी नी केरदै ज़ैण्ढै शुरुआती न केरा ती। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम4 पर महा तेरे बिरोधा में यह बोलणाा की ताए आपणा पहिले जेहा प्रेम छाडू। Viz kapitola |