मत्ती 5:5 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान5 परमेशर हआ तिन्नां लै खुश ज़ुंण घमंड निं करदै, तिंयां हणैं एसा पृथूईए हाकम। Viz kapitolaकुल्वी5 धन्य सी ते, ज़ो नम्र सी, किबैकि तिन्हां धौरती रै अधिकारी होंणा। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम5 धन्य त्याह साहा, जोह नम्र साहा, किबेकि त्याह धरती रे अधिकारी हूँणे। Viz kapitola |