मत्ती 27:64 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान64 ता तूह दै इहअ हुकम कि चिई धैल़ै तैणीं डाहणअ हाम्हां तेसा घोरी बागै राची-धैल़ी पहरअ पाई ज़िधी सह दाबी आसा डाहअ द। इहअ निं हआ कि तेऊए च़ेल्लै तेऊए ल्हास च़ोरी पाए और लोगा का लागे इहअ बोलदै कि सह हुअ मरी करै ज़िऊंदअ। अह हणअ हाम्हां लै पिछ़लै धोखै का बी खास्सअ बूरअ।” Viz kapitolaकुल्वी64 तुसै हुक्म केरा कि आसै त्रा रोज़ा तैंईंयैं कब्रै री पहरैदारी केरूई लोड़ी, कोइँछ़ै तेइरै च़ेले एज़िया तेइरी लाश नी लोड़ी च़ोरी होर लोका बै बोललै कि सौ ज़िन्दा हुआ सा। तैबै ऐ दुज़ा धोखा पिछ़लै धोखै न बी बुरा होंणा।” Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम64 आज्ञा दे कि चीई धियाड़ी तणी कब्रा री रखबाली करे , एडा नांई होए कि तेऊरे चेले तेऊ इच्छी करे चोरी निएँ होर लोका बे बोले, सह मुएँदे का जिऊंदअ होऊ। तेबा पिछला धोखा पहिले का भी बुरा हूँणा। Viz kapitola |