मत्ती 27:63 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान63 “हे श्रीमान, हाम्हां का आसा थोघ कि तेऊ झ़ुठै मणछै बोलअ त आपणीं ज़िऊंदी ज़िता इहअ, ‘मेरै मरनै का बाद हणअ मुंह चिई धैल़ै बाद भी ज़िऊंदै।’ Viz kapitolaकुल्वी63 “हे महाराज़, आसाबै याद डाह, तेई धोखै देणु आल़ै बोलू सा, कि मूँ मौरनै रै त्रा रोज़ा बाद फिरी ज़िन्दै होंणा। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम63 हे मालक, हामा याद साहा कि तेऊ भरमाऊण आले जेबा सह जिऊंदअ थी, बोलू, महा चीई धियाड़ी बाद भी जिऊंदे हूँणा। Viz kapitola |