मत्ती 25:40 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान40 तेभै दैणअ मुंह धर्मीं राज़ै तिन्नां लै ज़बाब, ‘हुंह खोज़ा तम्हां का सत्त कि ज़ुंण तम्हैं मुंह दी विश्वास करनै आल़ै होछ़ै का होछ़ै भाई-बैहणी मांझ़ै कसा एकी संघै बी किअ, सह किअ तम्हैं मुल्है।’ Viz kapitolaकुल्वी40 “तैबै मूँ राज़ै तिन्हां बै ज़वाब देणा, हांऊँ तुसाबै सच़ बोला सा कि तुसै बशाह केरनु आल़ै मौंझ़ै होछ़ै न होछ़ै विश्वासी भाई सैंघै ज़ो भी केरू सौ मूँ सैंघै केरू। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम40 तेबा राजे त्याबे उतर दींणा, हाऊं तमाबे सच बोला कि तमे जोह मेरे होछे का होछे भाई मजा का तमे कासु एकु संघे करू, सह मांई ही संघे करू। Viz kapitola |