मत्ती 23:35 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान35 ज़हा का धर्मीं हाबिला ओर्ही बिरक्याहे शोहरू जकरयाह तैणीं, ज़ुंण तम्हैं मांदरा और बेदी मांझ़ै मारी पाऐ तै, ज़ेतरै धर्मीं पृथूई दी तम्हैं मारै तेतो पाप दोश पल़णअ सारअ थारै मुंडै। Viz kapitolaकुल्वी35 धर्मी हाबिल न लेइया बिरिक्याह रै बेटै जकर्याह तैंईंयैं ज़ो कि तुसै मन्दिर होर वेदी रै बिच़ा न मारै ती होर ज़ेतरै धर्मी लोका रा लोहू एसा धौरती पैंधै हुआ सा सौ तुसाबै खूनी मना सी। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम35 जासू का धर्मी हाबिल का लई करे बिरिक्याह रे शोहरू जकर्याह तणी, जूण तमे देहुरे होर बेदी रे मन्झे मारू, जेतरे धर्मी रा लोहू धरती में बहाउ सह सबे थारे मुड़े पडना। Viz kapitola |