मत्ती 23:34 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान34 “तैहीता भाल़ा, मुंह छ़ाडणैं तम्हां सेटा लै आपणैं गूर, समझ़कार और शास्त्री। तम्हां पाणै तिन्नां मांझ़ै कई मारी और कई लै दैणीं क्रूसे सज़ा और कई च़िकणैं तम्हां आपणीं आराधना सभा दी कोल़ै करै और एकी नगरी का दुजी नगरी लै फिरनैं तम्हैं तिन्नां दरल़ाऊंदै। Viz kapitolaकुल्वी34 ऐबै तुसै शुणा, हांऊँ तुसा हागै भविष्यवाणी केरनु आल़ा, बुद्धिमान होर शास्त्री बै भेज़ा सा; होर तुसा तिन्हां न केतरै ता मारनै न बाद क्रूसा पैंधै च़ढ़ाणै होर आपणै आराधनालय न कोड़ै लाइया मारनै होर एकी ग्राँ न दुज़ै ग्राँ बै भगाणै। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम34 एतकी तणी हेरा, हाऊं तमा सेटा भविष्यद्वक्ता होर शास्त्री होर बुद्धिमाना भेजू; होर तमा त्याह मेंज़ा का कुछ मारी पाउंणे होर क्रुसा में चढ़ाउंणे, होर कुछ आपणे प्रार्थना घरा में कोड़े बाहंणे होर एकु नगरा का दूजे नगरा बे त्यारा पीछा करदे रहंणा। Viz kapitola |