कुलुस्सी 2:1 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान1 ज़ुंण लौदिकिया नगरी रहणैं आल़ै और तिन्नां सोभी विश्वासी लै ज़ुंणी हुंह अज़ी बी नांईं आथी भाल़अ द। हुंह च़ाहा इहअ कि तम्हां सोभी का लोल़ी थोघ लागअ कि हुंह थारी तैणीं केही मैन्थ करा। Viz kapitolaकुल्वी1 हांऊँ चाहा सा कि तुसाबै ऐ पता लोड़ी लागा, कि तुसाबै होर तिन्हां बै ज़ुण लौदीकिया शैहरा न सी, होर तिन्हां सैभी री तैंईंयैं ज़ुणी सैंघै हांऊँ नी मिलू, हांऊँ केतरी मेहनत केरा सा। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम1 हाऊं चाहंदा कि तमे जाणा, कि थारे होर त्याह वे जोह लौदीकिया में साहा, होर त्याह सभी वे जूणी मेरे शरीरा रअ मुँह नांई हेरू थी हाऊं केडी मेंहनत करा। Viz kapitola |