शधाणूं 27:9 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान9 ज़ांऊं खास्सै धैल़ै बितै, और समुंदरे सफरा त आजू कठण ब्रते धैल़ी गई ती बिती और आजू तै हिंऊंदे धैल़ै और समुंदरै ती ढिश-बागर एछणें डौर, ता पल़सी समझ़ाऊऐ तिंयां, Viz kapitolaकुल्वी9 ज़ैबै बोहू रोज़ बीतै, होर ज़हाज़ बै बढ़ाणा बी खतरै रा कोम ती, किबैकि ब्रतै रै ध्याड़ै रा त्यौहार खत्म हुऐ ती। होर ऐबै ऐण्ढा मौसम शुरू होंदा लागा ती ज़ैबै समुन्द्र रुखा होर तूफानी बणी ज़ा ती, तैबै पौलुसै तै ऐ बोलिया समझाऐ, Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम9 बहू बक्त बीतू होर जलयात्रा संकटमय होई अखे तणी कि ब्रता रे धयाडे बीती छेकि। तेबा पौलुस त्याह बे बोली करे चेतनगी दींदअ लागअ, Viz kapitola |