शधाणूं 27:21 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान21 ज़ांऊं तिंयां खास्सै धैल़ै भुखै रही मुक्कै, पल़सी उझ़ुअ खल़अ और तिन्नां लै बोलअ, “हे मणछो, हुअ ता लोल़ी ती इहअ कि तम्हैं मेरी गल्ला शुणदै और क्रेतै का नां ज़हाज़ खोल्ही आजू हांढदै और नां अह खरी और हान्नी हंदी। Viz kapitolaकुल्वी21 ज़ैबै तिन्हैं बोहू ब्रत केरै ता पौलुसै तिन्हरै बिच़ा न खड़ै होईया बोलू, हे लोको, अगर तुसै मेरी गैल मैनी ती होर क्रेत टापू न ज़हाज़ नी ती खोलू ता आसा पैंधै ऐ मुसीबत ऐन्दी न आसरा नुकसान होंदा। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम21 जेबा त्याह बहू धयाडी तणी भोछे रही, तेबा पौलुस त्या बीचे खड़े होई करे बोलू, हे लोको, जेबा तमे मेरी गलआ मानी करे क्रेता बे जहाजा नांई नींदे होर ना बिपति इंहणी, होर नाह हूंणी। Viz kapitola |