शधाणूं 26:18 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान18 तूह तिन्नें आछी खोल्हे कि न्हैरै का प्रैशै बाखा लै, और राख्से गुलामीं का परमेशरा बाखा लै फरेओए और परमेशर तिन्नें पाप माफ करे ज़ुंण मुंह दी विश्वास करी करै पबित्र आसा किऐ दै।’ (बधान 33:3-4; याशायाह 35:5-6; 42:7,16; 61:1) Viz kapitolaकुल्वी18 कि तू तिन्हरी औछ़ी खोलला तैबै ते निहारै न प्याशै धिरै बै होर शैतानै रै अधिकारा न परमेश्वरा धिराबै फिरलै ताकि तिन्हां बै पापै री माफी मिलली होर ज़ो लोका मूँ पैंधै बशाह केरिया पवित्र केरूऐ सी तिन्हां सैंघै मीरास पालै।’ Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम18 कि तूह त्याहरी आछी खोले कि त्या न्यारे का प्रयाषे फेरा बे, होर शैताना रा अधिकारा का परमेश्वरा फेरा बे फिरे कि पापा री क्षमा होर त्याह लोके संघे जोह माह पैंदे बुशाह करणणे री बजा का पवित्र होई दे साहा। आपणे कामा का परिबर्तन पाए। Viz kapitola |