शधाणूं 14:15 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान15 “भाईओ, तम्हैं अह किज़ै लाअ करी? हाम्हैं बी आसा तम्हां ई ज़िहै दुखा-सुखा भुगतणै आल़ै मणछ, और तम्हां का खोज़ा हाम्हैं अह खुशीओ समाद कि तम्हैं फिरा इना बेकार च़िज़ा का ज़ुदै हई तेऊ ज़िऊंदै परमेशरा बाखा लै, ज़ुंणी सरग, पृथूई, समुंदर और ज़ुंण बी तेथ दी आसा, सोभै गल्ला बणांईं। (लुआह 20:11; भज़न 146:6) Viz kapitolaकुल्वी15 “हे लोको, तुसै कि केरा सी? आसै बी ता तुसा सांही दु:ख-सुख भोगणू आल़ै मांहणु सी होर तुसाबै खुशी रा समाद शुणा सी कि तुसै बेकारै री च़िज़ा न अलग होईया ज़िन्दै परमेश्वरा धिराबै फिरा ज़ुणियै स्वर्ग, धौरती, समुन्द्र होर ज़ो किछ़ इन्हां न सा तेथा बै बनाणु आल़ा तूहै सा। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम15 हे लोको, तमे केह करदा? हामे भी तमा साही दुखा-सुखा रे भोगी मणश साहा, होर तमाबे सुसमाचार शूणाऊंदा कि तमे याहा बेकार री चीजा का अलग होई करे जिऊंदे परमेश्वरा फेरा बे फिरा, जासु सरग होर धरती होर समुद्र होर जोह कुछ एता में साहा बणाऊ। Viz kapitola |