शधाणूं 13:41 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान41 ‘हे निंदा करनै आल़ैओ, भाल़ा, और झशकिआ और मरा। किल्हैकि मुंह करनअ थारै धैल़ै एक काम, इहअ काम कि, ज़ै तम्हैं तेते च़रच़ा शुणें, ता तम्हैं निं कधि तेतो भरोस्सअ करनअ।’” Viz kapitolaकुल्वी41 “हे निन्दा केरनु आल़ै लोको, हेरा, हैरान होआ होर खत्म होआ; किबैकि मूँ तुसरै ध्याड़ै न एक ऐण्ढा कोम केरना कि अगर तुसा न कोई तेथै री चर्चा केरला, ता तुसा कैधी बशाह नी केरना।” Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम41 हे निंदा करण आलओ हेरा होर चकित होआ, होर खत्म होआ; किबेकी हाँऊ थारे धयाडे मेंज़ा का एक काम करदा, एडहा काम कि जेबा तमाक एतकी चर्चा करे, तमा कधी बुशाह नांई करणा। Viz kapitola |