2 कुरिन्थी 4:18 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान18 हाम्हैं निं तिन्नां खरी दी धैन दैंदै ज़ुंण हाम्हां का एभै शुझिआ पर हाम्हैं दैआ तिन्नां च़िज़ा दी धैन ज़ुंण हाम्हैं भाल़ी दी निं आथी। किल्हैकि ज़ुंण हाम्हैं एभै भाल़ा तिंयां आसा थोल़ै धैल़ै लै पर ज़ुंण च़िज़ा हाम्हैं भाल़ी निं आथी तिंयां रहणीं सदा बणीं। Viz kapitolaकुल्वी18 तैबै आसै तिन्हां परेशानी बै नैंई हेरदै; ज़ुणिबै आसा ऐबै हेरा सका सी, बल्कि आसै तिन्हां चीज़ा पैंधै नज़र पा सी। ज़ुणी चीज़ा बै आसै हेरा सी, तै छ़ेकै खत्म होंणी, पर ज़ुणी चीज़ा बै आसै हेरी नी सकदै तिन्हां हमेशा री तैंईंयैं रौहणा। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम18 होर हामे हेरी दी चीजा नांई पर जोह हेरी दी चीजा नांई तेसा हेरदे रहंदा; किबेकि हेरी दी चीजा कुछ ही धयाडी री साहा आसा पर नांई हेरी दी चीजा अनन्त तणी बणी रहंदा। Viz kapitola |