2 कुरिन्थी 12:21 - बाघली सराज़ी नऊंअ बधान21 किधी इहअ निं हआ ज़ेभै हुंह तम्हां सेटा भी फिरी एछूं तेभै पल़े मुंह परमेशरा सम्हनै शर्मिंदअ हणअ और मुंह तिन्नां लै शोग करनअ पल़े ज़ुंणी पैहलै निक्कै काम, शर्मिंदै करनै आल़ै काम और कंज़रैई ज़िहै पाप करनै अज़ी बी आपणअ मन निं बदल़अ। Viz kapitolaकुल्वी21 कोइँछ़ै ऐण्ढा नी हो कि ज़ैबै मूँ तुसा हागै वापस ऐणा, मेरा परमेश्वर मुँभै नम्र केरै होर मुँभै बोहू री तैंईंयैं फिरी दुःखी होंणा पौड़ै, ज़ुणियै आपणै पराणै पाप नैंई छ़ौड़ै। बुरै कोम, होर लुचपन, शर्मा री गैला, ज़ो तिन्हैं केरी, मन नी बदलू। Viz kapitolaईनर सराजी मे नया नियम21 होर कई एडा ना हो कि मेरअ परमेश्वर मेरे अशुद्ध हुणे का थारे अखे ईहंणे में महा पेन्दे दबाब पाए होर महा बहू बे भी शोक करणा पडे, जूणी पहिले पाप करू थी, होर गन्दे काम ब्यभिचार होर लुचपना का, जोह जूणी करू, मन नांई फेरु। Viz kapitola |