12 तीनुत मां सी एक जणु चु तींद्रुत अघली वात बताड़ने वाळु छे, चु कह्लु छे, “केरती माणसे जलम लुच्चा, उजग्ला जनवार्या ने आपसात ने पेट भरता रहे।”