20 ने मारा मन मां जी मरजी ने आस छे, की मे काहनी बी वातेम नी लाजवायो; बाकुन मेसेक पाक्कु भुरसु छे की, मारी जीवाय सी ईसु मसी काजे ईज्जत जड़ने बाजी रय, असीत अघी बी जड़से, भले मे जीवतेलु रहो, नी ते मर जाम।