44 ने तीनाक कह्यु, “सामळ जी वात कुय काजे घुण कहें, बाकुन जाय्न आपसा काजे पुजाराक देखाड़ ने आपसा चुखु हवणेन बारामां ज काय मुसु ठहरावलु छे तीनाक बादा चड़ाव की तींद्रा गवा बण जाय।”