1 ओ ईसुन मंडळी, तुसे काजे भगवान नेवाड़लु छे। मे डाहा-बुड़ा, जी चिट्ठी तुसे काजे ने तारा माणसे काजे लिखो। मे तुंद्रे सी छाचला मन सी परम करो।