6 ओ जे अपना सभ केँ अपन राज्य बनौने छथि और अपन पिता परमेश्वरक सेवा करबाक लेल पुरोहित बनौने छथि—तिनकर युगानुयुग स्तुति आ सामर्थ्य होइत रहनि। आमीन।