10 “प्रभुक दिन” मे हमरा प्रभुक आत्मा अपना नियन्त्रण मे लेलनि, और हम अपना पाछाँ धुतहूक आवाज जकाँ किनको आवाज जोर सँ ई कहैत सुनलहुँ जे,