19 हम, पौलुस, अपना हाथ सँ लिखि रहल छी जे, ओकर ऋण अहाँ केँ सधा देब। आ हम ई चर्चा करब आवश्यक नहि बुझैत छी जे अहाँ पर जे हमर ऋण अछि, से तँ अहाँक जीवने अछि।