23 दोसर सभ केँ आगि मे सँ खीचि कऽ बचाउ। फेर दोसर लोक एहन अछि, जकरा सभ पर दया करैत काल मे सावधान रहबाक अछि; ओकरा सभक ओहि वस्त्र सभ सँ सेहो घृणा करू जे पापी स्वभावक कुकर्म सँ अपवित्र कयल गेल अछि।