5 आब, बहिनजी, हम अहाँ केँ कोनो नव आज्ञा नहि लिखि रहल छी; ई अपना सभ केँ शुरुए सँ भेटल अछि—हम विनती करैत छी जे एक-दोसर सँ प्रेम करी।