2 कोरिन्थी 1:8 - jivən səndesh8 यौ भाइ लोकनि, हम सभ अहाँ सभ सँ ई नहि नुकाबऽ चाहैत छी जे आसिया प्रदेश मे हमरा सभ केँ केहन-केहन कष्ट उठाबऽ पड़ल। एहि कष्टक भार एतेक भारी छल जे ओ हमरा सभक सहनशक्तिक सीमा सँ बाहर छल, एतऽ तक जे हमरा सभ केँ जीवित बचबाक कोनो आशा नहि रहि गेल छल। Viz kapitola |