17 हमर निश्चय जँ यैह छल, तँ की हम बिनु कारणेँ अपन विचार बदलि लेलहुँ? की हम सांसारिक लोक सभ जकाँ बात नियारैत छी जे एके समय मे “हँ, हँ” सेहो आ “नहि, नहि” सेहो कही?