13 हम सभ तँ अहाँ सभ केँ कोनो एहन बात नहि लिखैत छी जकरा पढ़ला सँ अर्थ नहि बुझल जा सकैत अछि। हमरा आशा अछि जे अहाँ सभ जहिना एखन आंशिक रूप मे हमरा सभ केँ जनैत छी,