24 किएक तँ लिखल अछि जे, “सभ मनुष्य घास जकाँ अछि, और ओकरा सभक सम्पूर्ण सुन्दरता घासक फूल जकाँ छैक। घास सुखि जाइत अछि, आ फूल झरैत अछि,