26 यौ भाइ लोकनि, विचार करू, परमेश्वर अहाँ सभ केँ जहिया बजौलनि तहिया अहाँ सभ की छलहुँ? सांसारिक दृष्टिएँ अहाँ सभ मे सँ किछुए लोक ज्ञानी, सामर्थी वा खानदानी छलहुँ।