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प्रकाशितवाक्य 20:14 - कुल्वी

14-15 ज़ुणी लोकै रै नाँ ज़िन्दगी री कताबा न लिखुआँदा नी ती, ते सैभ औगी री झ़ीला न पाउए। तेथा न बाद होर ऐबै मौऊत नी, मूँऐंदै री ज़ैगा नी, किबैकि सैभ लोका ज़ुणिरै नाँ ज़िन्दगी री कताबा न नी लिखुऐ ती औगी री झ़ीला न पाऊऐ। सौऐ सा, ज़ुणिबै दुज़ी मौऊत, औगी री झ़ीला न सज़ा बोला सी

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बाघली सराज़ी नऊंअ बधान

14-15 ज़हा मणछे नांअ ज़िन्दगीए कताबा दी नांईं तै लिखै दै तिंयां पाऐ आगीए समुंदरा दी। तेता लै बोला दुजी मौत, ज़ुंण सज़ा तेऊ आगीए समुंदरा दी आसा। तेभा पोर्ही नां ता मौत हणीं और नां मौते ज़ैगा हणीं किल्हैकि तिंयां पाऐ तेऊ आगीए समुंदरा दी। (1 युहन्ना 5:11-12; युहन्ना 3:36)

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ईनर सराजी मे नया नियम

14 होर मऊत होर अधोलोक आगी रे कूड़ा में पाई यह आगी रअ कूड भी दूजी मउत साहा।

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प्रकाशितवाक्य 20:14

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